में जिन परमाणुओं के एकत्र हो जाने से इस स्त्री की रचना हुई है उसका संयोग बहुत ही नयनाभिराम है। लेकिन यह केवल परकृति की एक क्रीड़ा है, और परमाणु जड़वस्तु है। किसी दिन वह स्वाभाविक रीति से विच्छिन्न हो जाएंगे। जिन परमाणुओं से लैला और क्लियोपेट्रा की रचना हुई थी वह अब कहां हैं ? मैं मानता हूं कि स्त्रियां कभीकभी बहुत रूपवती होती हैं, लेकिन वह भी तो विपत्ति और घृणोत्पादक अवस्थाओं के वशीभूत हो जाती हैं। बुद्धिमानों को यह बात मालूम है, यद्यपि मूर्ख लोग इस पर ध्यान नहीं देते।'
योगी ने भी थायस को देखा। दार्शनिक ने भी। दोनों के मन में भिन्नभिन्न विचार उत्पन्न हुए। एक ने ईश्वर से फरियाद की, दूसरे ने उदासीनता से तत्त्व का निरूपण किया। इतने में रानी हेक्युबा ने अपनी कन्या को इशारों से समझाया, मानो कह रही है-इस हृदयहीन उलाइसेस पर अपना जादू डाल ! अपने रूपलावण्य, अपने
द्वार पर रुका जिसकी सायबान के स्तम्भ युवतियों की भांति सुन्दर थे। दीवारों पर यूनान के सर्वश्रेष्ठ ऋषियों की परतिमाएं शोभा दे रही थीं। पापनाशी ने अफलातूं, सुकरात अरस्तू, एपिक्युरस और जिनों की परतिमाएं पहचानीं और मन में कहा-इन मिथ्याभरम में पड़ने वाले मनुष्यों को कीर्तियों को मूर्तियों को मूर्तिमान करना मूर्खता है। अब उनके मिय्या विचारों की कलई खुल गयी। उनकी आत्मा अब नरक में पड़ी सड़ रही है, और यहां तक कि अफलातूं भी, जिसने संसार को अपनी परगल्भता से गुंजरित कर दिया था,