छिद गयीं। फीडरा की परेमकथा तो तुम जानते ही होगे। अपने परेमी का सर्वनाश करने के पश्चात वह स्वयं गले में फांसी डाल, एक हाथीदांत की खूंटी से लटकर मर गयी। देवताओं की ऐसी इच्छा हुई कि फीडरा की असह्य विरहवेदना के चिह्नस्वरूप इस वृक्ष की पत्तियों में नित्य छेद होते रहे। मैंने एक पत्ती तोड़ ली और लाकर उसे अपने पलंग के सिरहाने लटका दिया कि वह मुझे परेम की कुटिलता की याद दिलाती रहे और मेरे गुरु, अमर एपिक्युरस के सिद्घान्तों पर अटल रखे, जिसका उद्देश्य था कि कुवासना से डरना चाहिए। लेकिन यथार्थ में परेम जिगर का एक रोग है और कोई यह नहीं कह सकता कि यह रोग मुझे नहीं लग सकता।'
पापनाशी ने परश्न किया-'डोरियन, तुम्हारे आनन्द के विषय क्या हैं ?'
डोरियन ने खेद से कहा-'मेरे आनन्द का केवल एक विषय है, और वह भी बहुत आकर्षक नहीं। वह ध्यान है
तेरी शोभा को घृणित समझता हूं, तू पिशाचों का क्रीड़ास्थल है, तुझे धिक्कार है ! अर्थसेवियों की अपवित्र शय्या नास्तिकता का वितण्डा क्षेत्र, तुझे धिक्कार है ! और जिबरील, तू अपने पैरों से उस अशुद्ध वायु को शुद्ध कर दे जिसमें मैं सांस लेने वाला हूं, जिसमें यहां के विषैले कीटाणु मेरी आत्मा को भरष्ट न कर दें।'
इस तरह अपने विचारोद्गारों को शान्त करके पापनाशी शहर में परविष्ट हुआ। यह द्वार पत्थर का एक विशाल मण्डप था। उसके मेहराब की छांह में कई दरिद्र भिक्षुक बैठै हुए पथिकों के सामने