लेकिन पापनाशी ने उन दृष्टिपात तक न किया। सुनहरी खड़ाऊं पैरों में पहनकर और थैली कमरे में बांधकर उसने निसियास से कहा, जो विनोदभाव से उसकी ओर देख रहा था-निसियास, इन वस्तुओं के विषय में कुछ सन्देह मत करना, क्योंकि मैं इनका सदुपयोग करुंगा।

निसियास बोला-'पिय मित्र, मुझे कोई सन्देह नहीं हैं क्योंकि मेरा विश्वास है कि मनुष्य में न भले काम करने की क्षमता है न बुरे। भलाई व बुराई का आधार केवल परथा पर है। मैं उन सब कुत्सित व्यवहारों का पालन करता हूं जो इस नगर में परचलित हैं। इसलिए मेरी गणना सज्जन पुरुषों में है। अच्छा मित्र, अब जाओ और चैन करो।'

लेकिन पापनाशी ने उससे अपना उद्देश्य परकट करना अवश्यक समझा। बोला-'तुम थायस को जानते हो जो यहां की रंगशालाओं का शृंगार है ?' निसियास ने कहा-'वह परम सुन्दरी है और किसी समय मैं उसके परेमियों


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परलोकसुख के लिए ही इस लोक में कष्ट उठाना बुद्धिसंगत है। इसके परतिकूल व्यर्थ बिना किसी उद्देश्य के संयम और वरत का पालन करना, तपस्या से शरीर और रक्त तो घुलाना निरी मूर्खता है। अगर मुझे विश्वास न होता-हे अनादि ज्योति, इस दुर्वचन के लिए क्षमा कर-अगर मुझे उस सत्य पर विश्वास है, जिसका ईश्वर ने ऋषियों द्वारा उपदेश किया है, जिसका उसके परमपिरय पुत्र ने स्वयं आचरण किया है, जिसकी धर्म सभाओं ने और आत्मसमर्पण करने वाले महान पुरुषों ने साक्षी दी है-अगर मुझे


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