पर उसने घृणा के साथ सब वस्तुओं को सामने से हटा दिया। तब बोला-'निसियास, मैंने उस सत्पथ का परित्याग नहीं किया जिसे तुमने गलती से 'ईसाइयों की दुर्मति' कहा है। वही तो सत्य की आत्मा और ज्ञान का पराण है। आदि में केवल 'शब्द' था और 'शब्द' के साथ ईश्वर था, और शब्द ही ईश्वर था। उसी ने समस्त बरह्माण्ड की रचना की। वही जीवन का स्त्रोत है और जीवन मानवजाति का परकाश है।'
निसियास ने उत्तर दिया-'पिरय पापनाशी, क्या तुम्हें आशा है कि मैं अर्थहीन शब्दों के झंकार से चकित हो जाऊंगा ? क्या तुम भूल गये कि मैं स्वयं छोटामोटा दार्शनिक हूं? क्या तुम समझते हो कि मेरी शांति उन चिथड़ों से हो जाएेगी जो कुछ निबुर्द्धि मनुष्यों ने इमलियस के वस्त्रों से फाड़ लिया है, जब इसलियस, फलातूं, और अन्य तत्त्वज्ञानियों से मेरी शांति न हुई ? ऋषियों के निकाले हुए सिद्घान्त केवल कल्पित कथाएं हैं जो मानव सरलहृदयता
भांति जैसे नमक भोजन को स्वाद परदान करता है।'
पापनाशी ने अपवाद किया-'तो तुम्हारे मतानुसार संसार में कोई वस्तु स्थायी नहीं है ? तुम उस थके हुए कुत्ते की भांति हो, जो कीचड़ में पड़ा सो रहा है-अज्ञान के अन्धकार में अपना जीवन नष्ट कर रहे हो। तुम परतिमावादियों से भी गयेगुजरे हो।'
'मित्र, कुत्तों और ऋषियों का अपमान करना समान ही व्यर्थ है। कुत्ते क्या हैं, हम यह नहीं जानते। हमको किसी वस्तु का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं।'
'तो क्या तुम भरांतिवादियों में हो ? क्या तुम