है जिसकी औषधि नहीं, रोमराज्य के शस्त्रबल द्वारा संसार में शान्ति स्थापित होने के पहले, वही राष्ट्र सुखी और समृद्ध थे, जिनका अधिकार कुशल विचारशील स्वेच्छाचारी राजाओं के हाथ में था।'
हरमोडोरस-'महाशय कोटा, मेरा तो विचार है कि सुव्यवस्थित शासन पद्धति केवल एक कल्पित वस्तु है और हम उसे पराप्त करने में सफल नहीं हो सकते, क्योंकि यूनान के लोग भी, जो सभी विषयों में इतने निपुण और दक्ष थे, निर्दोष शासनपरणाली का आविर्भाव न कर सके। अतएव इस विषय में हमें सफल होने की कोई आशा भी नहीं। हम अनतिदूर भविष्य में उसकी कल्पना नहीं कर सकते। निभरार्न्त लक्षणों से परकट हो रहा है कि संसार शीघर ही मूर्खता और बर्बरता के अन्धकार में मग्न हुआ चाहता है। कोटा, हमें अपने जीवन में इन्हीं आंखों से बड़ीबड़ी भयंकर दुर्घटनाएं देखनी पड़ी हैं। विद्या, बुद्धि और सदाचरण से जितनी मानसिक सान्त्वनाएं
द्वारा वह पात्राएं दर्शकों का मन हर लेती थीं, और उसने सोचा, क्या मैं जो उन सबों से रूपवती हूं, ऐसा ही अभिनय करके दर्शकों को परसन्न नहीं कर सकती? वह रंगशाला व्यवस्थापक के पास गयी और उससे कहा कि मुझे भी इस नाट्यमंडली में सम्मिलित कर लीजिए। उसके सौन्दर्य ने उसकी पूर्वशिक्षा के साथ मिलकर उसकी सिफारिश की। व्यवस्थापक ने उसकी परार्थना स्वीकार कर ली। और वह पहली बार रंगमंच पर आयी।
पहले दर्शकों ने उसका बहुत आशाजनक स्वागत न किया। एक तो वह इस