ऊपर आप शासन करने का अधिकार था। मैं स्वीकार करता हूं कि स्वाधीनता सवोर्त्तम वस्तु है, जिस पर किसी राष्ट्र को गौरव हो सकता है। लेकिन ज्योंज्यों मेरी आयु गुजरती जाती है और अनुभव ब़ता जाता है, मुझे विश्वास होता है कि एक सशक्त और सुव्यवस्थित शासन ही परजा को यह गौरव परदान कर सकता है। गत चालीस वर्षों से मैं भिन्नभिन्न उच्चपदों पर राज्य की सेवा कर रहा हूं और मेरे दीर्घ अनुभव ने सिद्ध कर दिया है कि जब शासकशक्ति निर्बल होती है, तो परजा को अन्यायों का शिकर होना पड़ता है। अतएव वह वाणी कुशल, जमीन और आसमान के कुलाबे मिलाने वाले व्याख्याता जो शासन को निर्बल और अपंग बनाने की चेष्टा करते हैं, अत्यन्त निन्दनीय कार्य करते हैं, सम्भवतः कभीकभी परजा को घोर संकट में डाल देता है, लेकिन अगर वह परजामत के अनुसार शासन करता है तो फिर उसके विष का मंत्र नहीं वह ऐसा रोग
नगर के रागरंग में दिल खोलकर भाग लेने लगी। वह नित्य रंगशालाओं में आती जहां चतुर गवैये और नर्तक देशदेशान्तरों से आकर अपने करतब दिखाते थे और उत्तेजना के भूखे दर्शकवृन्द वाहवाह की ध्वनि से आसमान सिर पर उठा लेते थे।
थायस गायकों, अभिनेताओं, विशेषतः उन स्त्रियों के चालाल को बड़े ध्यान से देखा करती थी जो दुःखान्त नाटकों में मनुष्य से परेम करने वाली देवियों या देवताओं से परेम करने वाली स्त्रियों का अभिनय करती थीं। शीघर ही उसे वह लटके मालूम हो गये, जिनके