कि बुद्धि और तर्क विद्या पराप्ति के साधन हैं, किन्तु पराविद्या आत्मोल्लास द्वारा ही पराप्त हो सकती है। प्लेटो पीथागोरस अरस्तू आदि महात्माओं में अपार बुद्धिशक्ति थी, पर वह ईश्वर की उस अनन्य भक्ति से वंचित थे। जिसमें ईसू सराबोर थे। उनमें वह तन्मयता न थी। जो परभु मसीह में थी।'
हरमोडोरस-'जेनाथेमीज, तुम्हारा यह कथन सर्वथा सत्य है कि जैसे दूब ओस पीकर जीती और फैलती है, उसी परकार जीवात्मा का पोषण परंम आनन्द द्वारा होता है। लेकिन हम इसके आगे भी जा सकते हैं और कह सकते हैं कि केवल बुद्धि ही में परम आनन्द भोगने की क्षमता है। मनुष्य में सर्वपरधान बुद्धि ही है। पंचभूतों का बना हुआ शरीर तो जड़ है, जीवात्मा अधिक सूक्ष्म है, पर वह भी भौतिक है, केवल बुद्धि ही निर्विकार और अखण्ड है। जब वह भवनरूपी शरीर से परस्थान करके-जो अकस्मात निर्जन और शून्य हो गया हो-आत्मा के रमणीक
सम्बुल के फूल बटोरने चले जाते। उनकी थाली एक थी। प्याला एक था, मेज एक थी। लोलस उसके मुंह के अंगूर निकालकर अपने मुंह में खा जाता।
तब मीरा लोलस के पास आकर रोनेपीटने लगी कि मेरी थायस को छोड़ दो। वह मेरी बेटी है, मेरी आंखों की पुतली ! मैंने इसी उदर से उसे निकाल, इस गोद में उसका लालनपालन किया और अब तू उसे मेरी गोद से छीन लेना चाहता है।
लोलस ने उसे परचुर धन देकर विदा किया, लेकिन जब वह धनतृष्णा से लोलुप होकर फिर आयी तो