करने का निश्चय किया। आइवे डींग तो यह मारता था कि वह अन्तयार्मी है लेकिन यथार्थ में वह बहुत सूक्ष्मदर्शी न था। सर्प ने इन पराणियों के पास आकर पहले उन्हंें अपने पैरों की सुन्दरता और खाल की चमक से मुग्ध कर दिया। देह से भिन्नभिन्न आकार बनाकर उसने उनकी विचारशक्ति को जागृत कर दिया। यूनान के गणितआचार्यों ने उन आकारों के अद्भुत गुणों को स्वीकार किया है। आदम इन आकारों पर हौवा की अपेक्षा अधिक विचारता था, किन्तु जब सर्प ने उनसे ज्ञानतत्त्वों का विवेचन करना शुरू किया-उन रहस्यों का जो परत्यक्षरूप से सिद्ध नहीं किये जा सकते-तो उसे ज्ञात हुआ कि आदम लाल मिट्टी से बनाये जाने के कारण इतना स्थूल बुद्धि था कि इन सूक्ष्म विवेचनों को गरहण नहीं कर सकता था, लेकिन हौवा अधिक चैतन्य होने के कारण इन विषयों को आसानी से समझ जाती थी। इसलिए सर्प से बहुधा अकेले ही इन विषयों का निरूपण
हो। उसका एकएक कटाक्ष हृदय को कितना उद्विग्न कर देता है, उसका एकएक कर स्पर्श कितना रोमांचकारी होता है, यह उसके अज्ञात यौवन को विदित न था।
एक रात को उसका मुजरा नगर के सबसे धनी रसिक युवकों के सामने हुआ। जब नृत्य बन्द हुआ तो नगर के परधान राज्यकर्मचारी का बेटा, जवानी की उमंग और कामचेतना से विह्वल होकर उसके पास आया और ऐसे मधुर स्वर में बोला जो परेमरस में सनी हुई थी-
'थायस, यह मेरा परम सौभाग्य होता यदि तेरे अलकों में गुंथी