किये गये थे, लाकर मेज पर रखा। चार छोटेछोटे सुअर जो मैदे के बने थे, मानो उसका दूध पीने के लिए उत्सुक हैं। इससे परकट होता था कि सुअर मादा है।
जेनाथेमीज ने पापनाशी की ओर देखकर कहा-'मित्रो, हमारी सभा को आज एक नये मेहमान ने अपनी चरणों से पवित्र किया है। श्रद्धेय सन्त पापनाशी, जो मरुस्थल में एकान्तनिवासी और तपस्या करते हैं, आज संयोग से हमारे मेहमान हो गये हैं।'
कोटा-'मित्र जेनाथेमीज, इतना और ब़ा दो कि उन्होंने बिना निमन्त्रित हुए यह कृपा की है, इसलिए उन्हीं को सम्मानपद की शोभा ब़ानी चाहिए।
जेनाथेमीज-इसलिए मित्रवरो, हमारा कर्तव्य है कि उनके सम्मानार्थ वही बातें करें जो उनको रुचिकर हों। यह तो स्पष्ट है कि ऐसा त्यागी पुरुष मसालों की गन्ध को इतना रुचिकर नहीं समझता जितना पवित्र विचारों की सुगन्ध को। इसमें कोइे सन्देह नहीं है कि जितना आनन्द उन्हें ईसाई धर्मसिद्घान्तों
है।'
थायस ने कहा-'मैं शौक से तुम्हें साथ चलूंगी।' और उठकर बुयि के पीछे शहर के बाहर चली गयी।
बुयि का नाम मीरा था। उसके पास कई लड़केलड़कियों की एक मंडली थी। उन्हें उसने नाचना, गाना, नकलें करना सिखाया था। इस मंडली को लेकर वह नगरनगर घूमती थी, और अमीरों के जलसों में उनका नाचगाना कराके अच्छा पुरस्कार लिया करती थी।
उसकी चतुर आंखों ने देख लिया कि यह कोई साधारण लड़की नहीं है। उसका उठान कहे देता था कि आगे चलकर वह अत्यन्त रूपवती