सकता है, अगर लगन ही मनुष्य को ईश्वरतुल्य बना सकती, और साधनों से ही आत्मा परमात्मा में विलीन होती है, तो उस मेंक ने, जो अपने को फुलाकर बैल बना लेना चाहता था, निस्सन्देह वैराग्य का सर्वश्रेष्ठ सिद्घान्त चरितार्थ कर दिया।'
युक्राइटीज-'निसियास, तुम मसखरापन करते हो। इसके सिवा तुम्हें और कुछ नहीं आता। लेकिन जैसा तुम कहते हो वही सही। अगर वह बैल जिसको तुमने उल्लेख किया है वास्तव में एपिस* की भांति देवता है या उस पाताललोक के बैल के सदृश है जिसके मन्दिर** के अध्यक्ष को हम यहां बैठे हुए देख रहे हैं। और उस मेक ने सद्पररेणा से अपने को उस बैल के समतुल्य बना लिया, तो क्या वह बैल से अधिक श्रेष्ठ नहीं है ? यह सम्भव है कि तुम उस नन्हें से पशु के साहस और परात्र्कम की परशंसा न करो।'
चार सेवकों ने एक जंगली सुअर, जिसके अभी तक बाल भी अलग नहीं
दायेंबायें देखा कि कोई सुन तो नहीं रहा है, तब निस्संक होकर अत्यन्त मृदु कंठ से बोली-'अरे मेरी प्यारी आंखों की ज्योति, ओ मेरी खिली हुई गुलाब की कली, मेरे साथ चलो। क्यों इतना कष्ट सहती हो ? ऐसे मांबाप की झाड़ मारो। मेरे यहां तुम्हें नाचने और हंसने के सिवाय और कुछ न करना पड़ेगा। मैं तुम्हें शहद के रसगुल्ले खिलाऊंगी, और मेरा बेटा तुम्हें आंखों की पुतली बनाकर रखेगा। वह बड़ा सुन्दर सजीला जबान है, उसकी दा़ी पर अभी बाल भी नहीं निकले, गोरे रंग का कोमल स्वभाव का प्यारा लड़का