क्या बाधा हो सकती है, क्योंकि मुझे इसकी परवाह नहीं है कि संसार में सत्कर्म है या उठ गया। डोरियन, अपने आनन्द को अपने अधीन न रखना मूर्खों और मन्दबुद्धि वालों का काम है। मुझे ऐसी किसी वस्तु की इच्छा नहीं है जो विधाता की इच्छा के अनुकूल है। इस विधि से मैं अपने को उनसे अभिन्न बना लेता हूं और उनके निभरार्न्त सन्टोष में सहभागी हो जाता हूं। अगर सत्कर्मों का पतन हो रहा है तो हो, मैं परसन्न हूं, मुझे कोई आपत्ति नहीं। यह निरापत्ति मेरे चित्त आनन्द से भर देती है, क्योंकि यह मेरे तर्क या साहस की परमोज्ज्वल कीर्ति है। परत्येक विषय में मेरी बुद्धि देवबुद्धि का अनुसरण करती है, और नकल असल से कहीं मूल्यवान होती है। वह अविश्रान्त सच्चिन्ता और सदुद्योग का फल होती है।'
निसियास-'आपका आशय समझ गया। आप अपने को ईश्वर इच्छा के अनुरूप बनाते हैं। लेकिन अगर उद्योग ही से सब कुछ हो
पैदा किया और धन्य है तेरी माता जिसने तुझे पाला।'
थायस चुपचाप बैठी जमीन की ओर देखती रही। उसकी आंखें लाल थीं, वह रो रही थी।
बुयि ने फिर कहा-'मेरी आंखों की पुतली, मुन्नी, क्या तेरी माता तुझजैसी देवकन्या को पालपोसकर आनन्द से फूल नहीं जाती, और तेरा पिता तुझे देखकर गौरव से उन्मत्त नहीं हो जाता ?'
थायस ने इस तरह भुनभुनाकर उत्तर दिया, मानो मन ही में कह रही है-मेरा बाप शराब से फूला हुआ पीपा है और माता रक्त चूसने वाली जोंक है।
बुयि ने