ईश्वर जानता है, आज मैंने एक सुन्दर घोड़ा देखा। डेमोफून का था। उन्नत मस्तक है, छोटा मुंह और सुदृ़ टांगें। ऐसा गर्दन उठाकर अलबेली चाल से चलता है जैसे मुगार्।'
लेकिन चेरियास ने सिर हिलाकर शंका की-'ऐसा अच्छा घोड़ा तो नहीं है। एरिस्टोबोलस, जैसा तुम बतलाते हो। उसके सुम पतले हैं और गामचियां बहुत छोटी हैं। चाल का सच्चा नहीं, जल्द ही सुम लेने लगेगा, लंगड़े हो जाने का भय है।'
यह दोनों यही विवाद कर रहे थे। कि ड्रोसिया ने जोर से चीत्कार किया। उसकी आंखों में पानी भर आया, और वह जोर से खांसकर बोली-'कुशल हुई नहीं तो यह मछली का कांटा निगल गयी थी। देखो सलाई के बराबर है और उससे भी कहीं तेज। वह तो कहो, मैंने जल्दी से उंगली डालकर निकाल दिया। देवताओं की मुझ पर दया है। वह मुझे अवश्य प्यार करते हैं।'
निसियास ने मुस्कराकर कहा-'ड्रोसिया, तुमने
थी, और वहां क्या देखा? तब उसने मुस्कराकर कहा-
'वह स्वर्ग के दूत तुझे लेने को आ रहे हैं। उनका मुख कितना तेजस्वी है। वह अपने साथ फल और शराब लिये आते हैं। उनके परों से कैसी निर्मल, सुखद वायु चल रही है।'
और यह कहतेकहते उसका पराणान्त हो गया।
मरने पर भी उसका मुखमंडल आत्मोल्लास से उद्दीप्त हो रहा था। यहां तक कि वे सिपाही भी जो सलीब की रक्षा कर रहे थे, विस्मत हो गये। बिशप जीवन ने आकर शव का मृतकसंस्कार किया और ईसाई समुदाय