ने देखा कि दोनों युवतियों के मुख वर्णहीन हो गये हैं जैसे उड़ा हुआ रंग। तब वह उन्हें इसी दशा में छोड़कर पापनाशी के समीप एक कुसीर पर जा बैठी सहसा कोटा की मृदु, पर गर्व से भरी हुई कण्ठध्वनि कनफुसकियों के ऊपर सुनाई दी-

'मित्रो, आप लोग अपनेअपने स्थानों पर बैठ जायें। ओ गुलामो ! वह शराब लाओ जिसमें शहद मिली है।'

तब भरा हुआ प्याला हाथ में लेकर वह बोला-'पहले देवतुल्य समराट और सामराज्य के कर्णधार समराट कान्सटैनटाइन की शुभेच्छा का प्याला पियो। देश का स्थान सवोर्परि है, देवताओं से भी उच्च, क्योंकि देवता भी इसी के उदर में अवतरित होते हैं।'

सब मेहमानों ने भरे हुए प्याले होंठों से लगाये; केवल पापनाशी ने न पिया, क्योंकि कान्सटैनटाइन ने ईसाई सम्परदाय पर अत्याचार किये थे, इसलि भी कि ईसाई मत मत्र्यलोक में अपने स्वदेश का अस्तित्व नहीं मानता।

डोरियन ने प्याला


174 of 410

सुना, दीनता से न्यायाधीश को परणाम किया और तब कारागार में बन्द कर दिया गया। उसके जीवन के केवल तीन दिन और थे और तीनों दिनों दिन यह कैदियों को उपदेश देता रहा। कहते हैं उसके उपदेशों का ऐसा असर पड़ा कि सारे कैदी और जेल के कर्मचारी मसीह की शरण में आ गये। यह उसके अविचल धमार्नुराग का फल था।

चौथे दिन वह उसी स्थान पर पहुंचाया गया जहां से दो साल पहले, थायस को गोद में लिये वह बड़े आनन्द से निकला था। जब उसके हाथ सलीब पर ठोंक दिये


174 of 681