खोज करना वर्जित है। लेकिन मुझसे कोई पूछे तो मैं इस अद्भुत मनुष्य के होठों की अपेक्षा, एटना के जलते हुए, अग्निपरसारक मुख से चुम्बित होना अधिक पसन्द करुंगी। लेकिन बहन, इस विषय में तुम्हारा कोई वश नहीं। तुम देवियों की भांति रूपगुणशील और कोमल हृदय हो, और देवियों ही की भांति तुम्हें छोटेबड़े, भलेबुरे, सभी का मन रखना पड़ता है, सभी के आंसू पोंछने पड़ते हैं। हमारी तरह केवल सुन्दर सुकुमार ही की याचना स्वीकार करने से तुम्हारा यह लोकसम्मान कैसे होगा ?'
थायस ने कहा-'तुम दोनों जरा मुंह संभाल कर बातें करो। यह सिद्ध और चमत्कारी पुरुष है। कानों में कहीं कई बातें ही नहीं, मनोगत विचारों को भी जान लेता है। कहीं उसे क्रोध आ गया तो सोते में हृदय को चीर निकालेगा और उसके स्थान पर एक स्पंज रख देगा, दूसरे दिन जब तुम पानी पियोगी तो दम घुटने से मर जाओगी।'
थायस
अधर्म किया है ! चोरी को साबित करने के लिए कोई परमाण न था और अहमद पुकारपुकारकर कहता था-मुझ पर व्यर्थ ही यह दोषारोपण किया जाता है। तिस पर भी वह अदालत में खड़ा किया गया। थायस के पिता ने कहा-'यह कभी मन लगाकर काम नहीं करता।' न्यायाधीश ने उसे पराणदण्ड का हुक्म दे दिया। जब अहमद अदालत से चलने लगा तो न्यायधीश ने कहा-'तुमने अपने हाथों से अच्छी तरह काम नहीं लिया इसलिए अब यह सलीब में ठोंक दिये जायेंगे !'
अहमद ने शान्तिपूर्वक फैसला