विषय में कुछ नहीं कहा।
फिलिना ने थायस से कहा-'तुम्हारी रूपशोभा कितनी अद्भुत है ! जब तुम पहलेपहल इस्कन्द्रिया आयी थीं, उस समय भी तुम इससे अधिक सुन्दर न रही होगी। मेरी माता को तुम्हारी उस समय की सूरत याद है। यह कहती है कि उस समय समस्त नगर में तुम्हारे जोड़ की एक भी रमणी न थी। तुम्हारा सौन्दर्य अतुलनीय था।'
ड्रोसिया ने मुस्कराकर पूछा-'तुम्हारे साथ यह कौन नया परेमी आया है ? बड़ा विचित्र, भयंकर रूप है। अगर हाथियों के चरवाहे होते हैं तो इस पुरुष की सूरत अवश्य उनसे मिलती होगी। सच बताना बहन, यह वनमानुस तुम्हें कहां मिल गया ? क्या यह उन जन्तुओं में तो नहीं है जो रसातल में रहते हैं और वहां के धूमर परकाश से काले हो जाते हैं।'
लेकिन फिलिना ने ड्रोसिया के होंठों पर उंगली रख दी और बोली-'चुप ! परणय के रहस्य अभेद्य होते हैं और उनकी
हुए मेज के नीचे बैठे रहेंगे और उनका जूठन खायेंगे।'
यह शुभसन्देश शहर के कोनेकोने में गूंजने लगता और धनी स्वामियों को शंका होती कि कहीं उनके गुलाम उत्तेजित होकर बगावत न कर बैठें। थायस का पिता भी उससे जला करता था। वह कुत्सित भावों को गुप्त रखता।
एक दिन चांदी का एक नमकदान जो देवताओं के यज्ञ के लिए अलग रखा हुआ था, चोरी हो गया। अहमद ही अपराधी ठहराया गया। अवश्य अपने स्वामी को हानि पहुंचाने और देवताओं का अपमान करने के लिए उसने यह