क्षण के उपरान्त वह पापनाशी से फिर बोले-'सन्त पापनाशी, यहां तुम्हें कई सज्जन बैठे दिखाई दे रहे हैं जिनका सत्संग बड़े सौभाग्य से पराप्त होता है-यह सरापीज मन्दिर के अध्यक्ष हरमोडोरस हैं; यह तीनों दर्शन के ज्ञाता निसियास, डोरियन और जेनी हैं; यह कवि कलिक्रान्त हैं, यह दोनों युवक चेरिया और अरिस्टो पुराने मित्रों के पुत्र हैं और उनके निकट दोनों रमणियां फिलिना और ड्रोसिया हैं जिनकी रूपछवि पर हृदय मुग्ध हो जाता है।'
निसियास ने पापनाशी से आिंलगन किया और उसके कान में बोला-'बन्धुवर मैंने तुम्हें पहले ही सचेत कर दिया था कि बीनस (शृंगार की देवी-यूनान के लोग शुक्र को वीनस कहते थे) बड़ी बलवती है। यह उसी की शक्ति है जो तुम्हंें इच्छा न रहने पर भी यहां खींच लायी है। सुनो, तुम वीनस के आगे सिर न झुकाओगे, उसे सब देवताओं की माता न स्वीकार करोगे, तो तुम्हारा पतन निश्चित है। तुम
पेचदार, अलंकृत, उलझी हुई थी। तत्त्व कम, शब्दाडम्बर बहुत था। थायस मंत्रमुग्ध-सी बैठी सुनती रही।
भोजन समाप्त हो जाने का बिशप ने मेहमानों को थोड़ीसी शराब पिलाई। नशा च़ा तो वे बहकबहककर बातें करने लगे। एक क्षण के बाद अहमद और नीतिदा ने नाचना शुरू किया। यह परेतनृत्य था। दोनों हाथ हिलाहिलाकर कभी एकदूसरे की तरफ लपकते, कभी दूर हट जाते। जब सेवा होने में थोड़ी देर रह गयी तो अहमद ने थायस को फिर गोद में उठाया और घर चला आया।
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